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देश की युवा पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने में प्रयासरत स्पिक मैके

स्पिक मैकेस्पिक मैके की शुरुआत 1977 में आईआईटी, दिल्ली में डॉ. किरण सेठ ने की जिससे छात्रों को कम उम्र में ही भारत की कला व संस्कृति से परिचित कराया जा सके क्योंकि उस समय उनका मन और दिमाग अधिक ग्रहणशील होता है।

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सुविधाओं से वंचित बच्चों की किस्मत संवार रहे हैं एकलव्य विद्यालय

सुविधाओं से वंचित बच्चों की किस्मत संवार रहा है एकलव्य विद्यालयशिक्षा किसी भी देश और समुदाय के विकास के लिए सबसे जरूरी तत्‍व है। शिक्षा से ही सामाजिक और आर्थिक विकास संभव है। आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें शिक्षित करना नीति निर्माताओं के लिए हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 10.02 करोड़ से अधिक आबादी यानी  देश की जनसंख्या का 8.6 फीसदी अनुसूचित जनजाति है। लेकिन, साक्षरता की दृष्टि से यह तबका देश की प्रगति के साथ कदमताल नहीं मिला पा रहा है। आजादी के 70 साल बाद भी देश में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए उठाए गए कारगर कदमों के बावजूद सामान्य आबादी की तुलना में सामाजिक रूप से वंचित जनजातीय समुदायों के बीच शिक्षा के स्तर में बहुत अधिक अंतर बना हुआ है।

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Designing In India, By India For The World…

Designing In India, By India For The World…Think of design, and kaleidoscopic images of aesthetically designed articles will float before your eyes. Any idea who might be behind this myriad array? More often than not, it would bean alumnus from the National Institute of Design (NID), Ahmedabad. One of the top design schools across the globe, NID has always evoked respect and awe not only for the Institute per se, but also for the amazing designs, a product of the fertile minds honed in the hallowed portals of NID, dotting the entire world.

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